यह अनुभव किसी साथी द्वारा साझा किया गया है · नाम: छिपाया गया है
रात को आसमान के तारे देखकर लगता है कि मैं इस विशाल ब्रह्मांड में कितना छोटा हूँ। यह एहसास मुझे डराता भी है और सुकून भी देता है। ऐसा क्यों?
श्लोक
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः। अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च।।20।।
aham ātmā guḍākeśha sarva-bhūtāśhaya-sthitaḥ aham ādiśh cha madhyaṁ cha bhūtānām anta eva cha
श्रीमद्भगवद्गीता · 10.20
चौपाई / दोहा
सब कर मत खगनायक एहा। करिअ राम पद पंकज नेहा॥
saba kara mata khaganayaka eha, karia Rama pada pankaja neha
अर्थ
सबका मत यही है — राम के चरणों में प्रेम कीजिए। जब कुछ समझ न आए, तब श्रद्धा ही सबसे सरल रास्ता है।
श्रीरामचरितमानस · उत्तरकाण्ड
कथा
भगीरथ: जब काम इतना बड़ा हो कि एक जिंदगी छोटी पड़ जाए
भगीरथ के सामने कोई छोटा लक्ष्य नहीं था।
उनके पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा को धरती पर लाना था।
कहा जाता है कि उनसे पहले भी कई पीढ़ियों ने इसके लिए प्रयास किया था।
वे सफल नहीं हुए।
लेकिन भगीरथ ने उस असफलता को यह मानकर स्वीकार नहीं किया कि "अब कुछ नहीं हो सकता।
"
उन्होंने तपस्या शुरू की।
लंबा समय बीत गया।
फिर ब्रह्मा प्रसन्न हुए और गंगा को धरती पर आने की अनुमति मिली।
लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई।
गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि यदि वह सीधे धरती पर उतरतीं, तो सब कुछ बह जाता।
अब भगीरथ को दूसरा रास्ता खोजना था।
उन्होंने फिर तपस्या की।
इस बार शिव की।
शिव ने गंगा के वेग को अपनी जटाओं में धारण किया और फिर उसे नियंत्रित रूप से धरती पर प्रवाहित किया।
आखिरकार गंगा भगीरथ के पूर्वजों तक पहुंचीं।
भगीरथ की कहानी इसलिए याद की जाती है कि उन्होंने एक असंभव लगने वाले काम के सामने बार-बार रास्ता बदला, लेकिन लक्ष्य नहीं छोड़ा।
यह बात आज की जिंदगी में भी कितनी काम की है।
कभी हम किसी परीक्षा में असफल होते हैं।
कभी कारोबार नहीं चलता।
कभी नौकरी नहीं मिलती।
कभी सालों की मेहनत का परिणाम नहीं आता।
और हम सोचते हैं —
"शायद यह मेरे लिए है ही नहीं।
"
लेकिन असफलता हमेशा यह नहीं बताती कि लक्ष्य गलत है।
कभी-कभी वह सिर्फ यह बताती है कि तरीका बदलना पड़ेगा।
Linked wisdom: Valmiki Ramayana, Bala Kanda / Bhagavata Purana; needs citation-level verification | Evidence: traditional | Topics: जीवन संघर्ष, धैर्य, हार
स्वज्ञान विशेषज्ञ आपको सुझाव देते हैं
आपका प्रश्न — “रात को आसमान के तारे देखकर लगता है कि मैं इस विशाल ब्रह्मांड में कितना छोटा हूँ।
यह एहसास मुझे डराता भी है और सुकून भी देता है।
ऐसा क्यों?
” — केवल आपका नहीं है; यही पीड़ा सदियों से मनुष्य के भीतर रही है।
इसी कारण ऊपर श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की पंक्तियाँ इस अनुभव से जोड़ी गई हैं।
और चौपाई इसी बात को सरल भाषा में दोहराती है — सबका मत यही है — राम के चरणों में प्रेम कीजिए।
जब कुछ समझ न आए, तब श्रद्धा ही सबसे सरल रास्ता है।
इस अनुभव से एक बात स्पष्ट होती है — एक बार असफल होना और हमेशा के लिए हार जाना अलग बातें हैं।
✦ क्या करें
- • जो हो चुका है, उसे पहले स्वीकार कीजिए — विरोध से मन और थकता है।
- • आज एक छोटा-सा सही कर्म चुनिए, पूरा समाधान एक दिन में नहीं आता।
- • किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से मन की बात कहिए।
- • दिन में कुछ क्षण शांत बैठकर श्वास पर ध्यान दीजिए।
✦ क्या न करें
- • स्वयं को दोष देकर मन को और कमज़ोर मत कीजिए।
- • क्रोध या भय में कोई बड़ा निर्णय अभी मत लीजिए।
- • दूसरों से अपनी परिस्थिति की तुलना मत कीजिए।
- • अकेलेपन में लंबे समय तक मत रहिए।
जिस दिन आप अपनी परिस्थिति को शांत मन से देख पाएँगे, उसी दिन से मार्ग स्वयं खुलने लगेगा। आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक सक्षम हैं।
इस अनुभव से एक बात सामने आती है
एक बार असफल होना और हमेशा के लिए हार जाना अलग बातें हैं।
ऐसे ही कुछ और अनुभव
क्या यह परिस्थिति आपके जीवन से मिलती है?
यह जगह सलाह देने की नहीं, अपना अनुभव बाँटने की है।
अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा। पहली बात आपकी हो सकती है।
आपका नाम कहीं नहीं दिखेगा। हर अनुभव गुमनाम रहता है।
हर बात समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होती है।
