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कभी-कभी सोचता हूँ कि मेरा जन्म आखिर क्यों हुआ, किस वजह से मैं इस दुनिया में आया। क्या इसका कोई ठोस कारण होता है?
श्लोक
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।14।।
mātrā-sparśhās tu kaunteya śhītoṣhṇa-sukha-duḥkha-dāḥ āgamāpāyino 'nityās tans-titikṣhasva bhārata
श्रीमद्भगवद्गीता · 2.14
चौपाई / दोहा
जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥
jehi ken jehi para satya sanehu, so tehi milai na kachhu sandehu
अर्थ
जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे मिलता ही है — इसमें संदेह नहीं। सच्चा प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
श्रीरामचरितमानस · उत्तरकाण्ड
कथा
शबरी: जब इंतज़ार सिर्फ इंतज़ार नहीं रहता
शबरी के जीवन की सबसे बड़ी कहानी शायद यही थी कि वह इंतजार करती रहीं।
उनके गुरु मतंग ऋषि ने उन्हें विश्वास दिया था कि एक दिन श्रीराम उनके आश्रम आएंगे।
गुरु चले गए।
समय बीत गया।
आश्रम में रहने वाले दूसरे लोग धीरे-धीरे चले गए।
लेकिन शबरी वहीं रहीं।
हर सुबह वह आश्रम के आसपास सफाई करतीं।
रास्ता साफ करतीं।
सोचतीं —
"शायद आज राम आएं।
"
वह जंगल से बेर चुनकर लातीं।
हर बेर को चखकर देखतीं कि कौन सा मीठा है और कौन सा नहीं।
उनका मन था कि अगर राम आएं, तो उन्हें सबसे अच्छे बेर खिलाऊंगी।
साल बीत गए।
उम्र बढ़ती गई।
लेकिन उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।
फिर एक दिन राम और लक्ष्मण सचमुच वहां पहुंचे।
सीता की खोज में भटकते हुए वे शबरी के आश्रम तक आए।
शबरी की खुशी की कल्पना करना भी मुश्किल है।
जिस व्यक्ति का इंतजार उन्होंने वर्षों तक किया था, वह आखिर उनके सामने था।
उन्होंने अपने बेर राम को दिए।
परंपरा में यह प्रसंग बहुत प्रेम से याद किया जाता है — शबरी के प्रेम को राम ने महत्व दिया।
मुझे इस कहानी में सबसे खूबसूरत बात यह लगती है कि शबरी सिर्फ बैठकर इंतजार नहीं करती थीं।
वह हर दिन तैयारी करती थीं।
रास्ता साफ करती थीं।
बेर चुनती थीं।
आश्रम संभालती थीं।
यानी उम्मीद उनके लिए निष्क्रिय इंतजार नहीं थी।
Linked wisdom: Valmiki Ramayana / Ramcharitmanas — Shabari episode; needs citation-level verification | Evidence: traditional | Topics: अकेलापन, आस्था, प्रतीक्षा
स्वज्ञान विशेषज्ञ आपको सुझाव देते हैं
आपका प्रश्न — “कभी-कभी सोचता हूँ कि मेरा जन्म आखिर क्यों हुआ, किस वजह से मैं इस दुनिया में आया।
क्या इसका कोई ठोस कारण होता है?
” — केवल आपका नहीं है; यही पीड़ा सदियों से मनुष्य के भीतर रही है।
इसी कारण ऊपर श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की पंक्तियाँ इस अनुभव से जोड़ी गई हैं।
और चौपाई इसी बात को सरल भाषा में दोहराती है — जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे मिलता ही है — इसमें संदेह नहीं।
सच्चा प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
इस अनुभव से एक बात स्पष्ट होती है — जिस चीज़ का मैं इंतजार कर रहा हूं, उसके लिए आज मैं क्या कर रहा हूं — यह सवाल भी उतना ही जरूरी है।
✦ क्या करें
- • जो हो चुका है, उसे पहले स्वीकार कीजिए — विरोध से मन और थकता है।
- • आज एक छोटा-सा सही कर्म चुनिए, पूरा समाधान एक दिन में नहीं आता।
- • किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से मन की बात कहिए।
- • दिन में कुछ क्षण शांत बैठकर श्वास पर ध्यान दीजिए।
✦ क्या न करें
- • स्वयं को दोष देकर मन को और कमज़ोर मत कीजिए।
- • क्रोध या भय में कोई बड़ा निर्णय अभी मत लीजिए।
- • दूसरों से अपनी परिस्थिति की तुलना मत कीजिए।
- • अकेलेपन में लंबे समय तक मत रहिए।
जिस दिन आप अपनी परिस्थिति को शांत मन से देख पाएँगे, उसी दिन से मार्ग स्वयं खुलने लगेगा। आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक सक्षम हैं।
इस अनुभव से एक बात सामने आती है
जिस चीज़ का मैं इंतजार कर रहा हूं, उसके लिए आज मैं क्या कर रहा हूं — यह सवाल भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे ही कुछ और अनुभव
क्या यह परिस्थिति आपके जीवन से मिलती है?
यह जगह सलाह देने की नहीं, अपना अनुभव बाँटने की है।
अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा। पहली बात आपकी हो सकती है।
आपका नाम कहीं नहीं दिखेगा। हर अनुभव गुमनाम रहता है।
हर बात समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होती है।
