← पूजा और संस्कारबृहस्पति (गुरु) पूजा
बृहस्पति से संबंधित · ग्रह शांति
अन्य नाम: गुरुवार व्रत, बृहस्पतिवार पूजा
यह पूजा क्या है?
बृहस्पति देव और विष्णु को समर्पित गुरुवार का व्रत एवं पूजा, जिसमें पीले वस्त्र, चने की दाल और केले के वृक्ष की पूजा होती है।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
बृहस्पति ज्ञान, विवेक, विवाह और संतान के कारक माने गए हैं। जब जीवन में दिशा और शुभ निर्णय की कमी लगे, तब यह उपासना विवेक जगाने के लिए की जाती है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
शुभ निर्णय लेने की शक्ति; विवाह योग बनने की मान्यता; संतान सुख; अध्ययन में एकाग्रता; सम्मान और गुरु-कृपा की प्राप्ति।
कब की जाती है?
प्रत्येक गुरुवार, प्रातःकाल।
कौन कर सकता है?
अविवाहित युवक-युवती, विद्यार्थी, तथा संतान की कामना रखने वाले दंपति।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
गुरुवार को पीला भोजन, पीले वस्त्र और चने की दाल का दान श्रेष्ठ। इस दिन बाल-दाढ़ी न कटवाएँ, यह पारंपरिक नियम है।
कब नहीं करनी चाहिए?
अस्वस्थता में निर्जल व्रत न रखें।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें
- 2. केले के वृक्ष या विष्णु प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएँ
- 3. हल्दी, चने की दाल, पीले पुष्प और गुड़ अर्पित करें
- 4. "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का 108 बार जप करें
- 5. बृहस्पतिवार व्रत कथा सुनें या पढ़ें
- 6. पीला भोजन, चने की दाल या पुस्तक दान करें
विस्तृत विधि
गुरु उपासना का सार सीखने की विनम्रता है। परंपरा में कहा गया है कि गुरुवार को यदि कोई व्यक्ति किसी से कुछ सीख ले या किसी को निःशुल्क कुछ सिखा दे, तो वह दिन सफल माना जाता है। इसलिए इस पूजा के साथ किसी विद्यार्थी की सहायता या पुस्तक दान अवश्य किया जाता है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.पीले वस्त्र
- 2.हल्दी
- 3.चने की दाल
- 4.गुड़
- 5.पीले पुष्प
- 6.केले का वृक्ष
- 7.घी का दीपक
- 8.व्रत कथा पुस्तक
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
बिहार और उत्तर प्रदेश में केले के वृक्ष की पूजा प्रमुख है; दक्षिण में दक्षिणामूर्ति उपासना प्रचलित।
पारंपरिक महत्व
गुरु को ग्रहों में सबसे शुभ कहा गया है — वे जो देते हैं वह धन नहीं, विवेक है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: बृहस्पति व्रत कथा · विष्णु पुराण
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
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आपके अनुभव और प्रश्न
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