← पूजा और संस्कारबुध पूजा
बुध से संबंधित · ग्रह शांति
अन्य नाम: बुधवार पूजा, बुध ग्रह शांति
यह पूजा क्या है?
बुध ग्रह और गणेश जी को समर्पित बुधवार की पूजा, जिसमें हरे रंग, मूंग और दूर्वा का प्रयोग होता है।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
बुध बुद्धि, वाणी, गणना और व्यापार के कारक हैं। असंतुलित बुध से भ्रम, गलत निर्णय और संवाद में कटुता आती है। यह पूजा बुद्धि को स्थिर करने के लिए है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है; वाणी में मधुरता आती है; व्यापारिक निर्णय स्पष्ट होते हैं; परीक्षा और साक्षात्कार में आत्मविश्वास बढ़ता है।
कब की जाती है?
प्रत्येक बुधवार, प्रातःकाल।
कौन कर सकता है?
विद्यार्थी, व्यापारी, शिक्षक तथा कोई भी साधक।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
बुधवार को हरे वस्त्र और मूंग दाल का दान श्रेष्ठ। इस दिन किसी का उपहास या कटु वचन पूर्णतः त्यागें।
कब नहीं करनी चाहिए?
कोई विशेष निषेध नहीं।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. प्रातः स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें
- 2. गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें
- 3. हरे मूंग, हरे पुष्प और तुलसी दल चढ़ाएँ
- 4. "ॐ बुं बुधाय नमः" का 108 बार जप करें
- 5. गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश स्तुति पढ़ें
- 6. हरी मूंग, कॉपी-पुस्तक या हरा वस्त्र दान करें
विस्तृत विधि
बुध की उपासना का केंद्र वाणी है। परंपरा है कि इस दिन साधक कम बोले और जो बोले वह सत्य और मधुर हो। विद्यार्थियों के लिए कहा गया है कि जप के बाद पंद्रह मिनट मौन बैठकर अध्ययन करें — इससे एकाग्रता का अभ्यास बनता है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.हरे वस्त्र
- 2.मूंग दाल
- 3.दूर्वा
- 4.हरे पुष्प
- 5.तुलसी दल
- 6.मोदक या गुड़
- 7.घी का दीपक
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
महाराष्ट्र में गणपति उपासना के साथ जुड़ा; उत्तर भारत में स्वतंत्र बुध पूजा प्रचलित।
पारंपरिक महत्व
बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है — बुद्धि जब विनम्र होती है तभी फलती है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: ग्रह शांति परंपरा · गणेश पुराण
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
शायद आप यह भी देखना चाहें

आपके अनुभव और प्रश्न
इस पूजा से जुड़ा अपना अनुभव या जिज्ञासा यहाँ साझा करें। नाम देना आवश्यक नहीं है।
अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा। पहली बात आपकी हो सकती है।