← पूजा और संस्कारहनुमान चालीसा पाठ
हनुमान से संबंधित · नित्य पाठ
अन्य नाम: चालीसा पाठ
यह पूजा क्या है?
तुलसीदास रचित चालीस चौपाइयों का पाठ, जिसे प्रतिदिन या मंगलवार-शनिवार को किया जाता है।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
हनुमान जी भय-नाशक और बल के देवता माने गए हैं। यह पाठ मन में साहस, स्थिरता और रक्षा का भाव जगाने के लिए किया जाता है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
भय और घबराहट में तुरंत राहत का अनुभव; आत्मविश्वास की वापसी; अनिद्रा और बुरे स्वप्न में कमी; कठिन कार्य में मन टिकना।
कब की जाती है?
प्रतिदिन प्रातः या संध्या; मंगलवार और शनिवार को विशेष।
कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, किसी भी आयु में, किसी भी भाषा में।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
पाठ शुद्ध उच्चारण और स्थिर आसन से करें। संकट के समय ग्यारह बार पाठ की परंपरा है।
कब नहीं करनी चाहिए?
कोई निषेध नहीं — यह सबसे सुलभ साधना मानी गई है।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. स्नान कर स्वच्छ आसन पर बैठें
- 2. हनुमान जी के समक्ष घी या चमेली तेल का दीपक जलाएँ
- 3. सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें
- 4. हनुमान चालीसा का पूर्ण पाठ करें
- 5. अंत में "श्रीराम जय राम जय जय राम" का जप करें
- 6. गुड़-चना का प्रसाद बाँटें
विस्तृत विधि
चालीसा पाठ की शक्ति उसकी निरंतरता में है। परंपरा में कहा गया है कि इक्कीस दिन बिना नागा पाठ करने से मन का भय स्वयं उतरने लगता है। जिन्हें रात में भय लगता है, उन्हें सोने से पूर्व पाठ करने को कहा गया है। यदि समय कम हो तो केवल "भूत पिसाच निकट नहिं आवै" वाली पंक्ति का ग्यारह बार जप भी परंपरा में मान्य है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.हनुमान चालीसा पुस्तिका
- 2.सिंदूर
- 3.चमेली का तेल
- 4.लाल पुष्प
- 5.गुड़ और चना
- 6.दीपक
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
सम्पूर्ण भारत में समान रूप से प्रचलित।
पारंपरिक महत्व
यह वह पाठ है जिसे बालक भी कर सकता है और वृद्ध भी — इसकी सरलता ही इसकी सामर्थ्य है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: हनुमान चालीसा — तुलसीदास
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
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आपके अनुभव और प्रश्न
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