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मंगल से संबंधित · ग्रह शांति
अन्य नाम: मांगलिक दोष शांति, भौम दोष शांति
यह पूजा क्या है?
मंगल ग्रह की शांति हेतु मंगलवार को किया जाने वाला व्रत, हनुमान उपासना और मंगल मंत्र जप।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
मंगल ऊर्जा, साहस और आवेग का ग्रह है। असंतुलित होने पर वही ऊर्जा क्रोध, जल्दबाजी और टकराव बन जाती है, जिससे विवाह और साझेदारी में बाधा आती है। यह पूजा उस ऊर्जा को संयमित दिशा देने के लिए है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
क्रोध और आवेग में कमी; विवाह-वार्ता में आ रही अकारण रुकावटें दूर होना; भाई-बंधु से संबंध सुधरना; रक्त-विकार और दुर्घटना से रक्षा की मान्यता।
कब की जाती है?
प्रत्येक मंगलवार, प्रातःकाल। मंगल की होरा में विशेष शुभ।
कौन कर सकता है?
विवाह योग्य युवक-युवती, या उनके माता-पिता उनके निमित्त भी कर सकते हैं।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
मंगलवार को लाल वस्त्र, गुड़ और मसूर दाल का दान करें। इस दिन क्रोध, कटु वचन और विवाद से पूर्ण संयम रखें — यही मुख्य साधना है।
कब नहीं करनी चाहिए?
शारीरिक दुर्बलता में उपवास न करें, केवल जप और दान करें।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र पहनें
- 2. हनुमान जी को चोला या सिंदूर अर्पित करें
- 3. लाल पुष्प, मसूर दाल और गुड़ चढ़ाएँ
- 4. "ॐ अं अंगारकाय नमः" का 108 बार जप करें
- 5. हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें
- 6. मसूर दाल, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करें
विस्तृत विधि
मंगल शांति में क्रिया से अधिक संयम का महत्व है। परंपरा कहती है कि यदि साधक मंगलवार के दिन एक बार भी क्रोध में कठोर वचन बोल दे तो उस दिन का जप निष्फल माना जाता है। इसलिए इस दिन मौन, मधुर वाणी और श्रम-सेवा का अभ्यास किया जाता है। विवाह बाधा के लिए यह क्रम लगातार इक्कीस मंगलवार तक करने की परंपरा है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.लाल वस्त्र
- 2.सिंदूर
- 3.चमेली का तेल
- 4.मसूर दाल
- 5.गुड़
- 6.लाल पुष्प
- 7.हनुमान चालीसा पुस्तिका
- 8.दीपक और घी
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
उत्तर भारत में बजरंग बाण का पाठ प्रमुख है; दक्षिण में सुब्रह्मण्य उपासना से जोड़ा जाता है।
पारंपरिक महत्व
मंगल को भूमि-पुत्र कहा गया है — धैर्य से धारण की गई ऊर्जा ही रक्षा करती है, बिखरी हुई ऊर्जा हानि करती है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: ज्योतिष निबंध · स्कंद पुराण
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
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आपके अनुभव और प्रश्न
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