यह अनुभव किसी साथी द्वारा साझा किया गया है · नाम: छिपाया गया है
घर की जिम्मेदारियां अलग हैं और बाहर की जिम्मेदारियां अलग। हर किसी को लगता है कि मैं सब संभाल लूंगा, लेकिन सच यह है कि अंदर से बहुत थक चुका हूँ। कभी-कभी लगता है कि बस सब छोड़कर कहीं चला जाऊँ। इस स्थिति को कैसे संभालूँ?
श्लोक
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः। अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च।।20।।
aham ātmā guḍākeśha sarva-bhūtāśhaya-sthitaḥ aham ādiśh cha madhyaṁ cha bhūtānām anta eva cha
श्रीमद्भगवद्गीता · 10.20
चौपाई / दोहा
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तरक बढ़ावै साखा॥
hoihi soi jo Rama rachi rakha, ko kari tarka badhavai sakha
अर्थ
जो होना राम ने रच रखा है, वही होगा — व्यर्थ के तर्कों से केवल उलझन बढ़ती है। मन को इस भरोसे में टिकाना ही शांति का पहला कदम है।
श्रीरामचरितमानस · बालकाण्ड
कथा
विश्वामित्र: जब गिरने के बाद फिर से शुरू करना पड़े
विश्वामित्र मूल रूप से एक राजा थे।
फिर उन्होंने एक बड़ा लक्ष्य चुना — तपस्या करके ब्रह्मर्षि का पद प्राप्त करना।
उन्होंने अपना जीवन बदल दिया।
तपस्या शुरू की।
लंबे समय तक साधना की।
लेकिन जैसे-जैसे उनका तप बढ़ता गया, उनकी परीक्षा भी बढ़ती गई।
कथा में आता है कि मेनका को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा गया।
विश्वामित्र उनके आकर्षण में पड़ गए।
उनका ध्यान अपने लक्ष्य से हट गया।
समय बीतता गया।
फिर एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि वे अपने रास्ते से बहुत दूर निकल चुके हैं।
अब उनके सामने दो रास्ते थे।
एक — खुद को असफल मानकर सब छोड़ देना।
दूसरा — वापस लौटना।
उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
उन्होंने मेनका से विदा ली और फिर तपस्या में लौट गए।
इस बार वे पहले से ज्यादा सावधान थे।
उन्होंने अपने भीतर की कमजोरी को पहचाना था।
और शायद यही बात उनकी कहानी को हमारे लिए उपयोगी बनाती है।
हम असफल होते हैं तो अक्सर सोचते हैं —
"अब क्या फायदा?
"
"मैं फिर वही गलती करूंगा।
"
"इतना समय खराब कर दिया।
"
लेकिन गलती के बाद लौटना भी एक तरह की शक्ति है।
अगर कोई व्यक्ति दस साल से गलत दिशा में जा रहा है और ग्यारहवें साल सही रास्ते पर लौट आता है, तो उसके पहले दस साल वापस नहीं आएंगे।
लेकिन उसका बाकी जीवन बदल सकता है।
महाभारत · Linked wisdom: Mahabharata / Ramayana traditions — citation-level verification required | Evidence: traditional | Topics: प्रलोभन, पुनः प्रयास, आत्मसंशय
स्वज्ञान विशेषज्ञ आपको सुझाव देते हैं
आपका प्रश्न — “घर की जिम्मेदारियां अलग हैं और बाहर की जिम्मेदारियां अलग।
हर किसी को लगता है कि मैं सब संभाल लूंगा, लेकिन सच यह है कि अंदर से बहुत थक चुका हूँ।
कभी-कभी लगता है कि बस सब छोड़कर कहीं चला जाऊँ।
इस स्थिति को कैसे संभालूँ?
” — केवल आपका नहीं है; यही पीड़ा सदियों से मनुष्य के भीतर रही है।
इसी कारण ऊपर श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस की पंक्तियाँ इस अनुभव से जोड़ी गई हैं।
और चौपाई इसी बात को सरल भाषा में दोहराती है — जो होना राम ने रच रखा है, वही होगा — व्यर्थ के तर्कों से केवल उलझन बढ़ती है।
मन को इस भरोसे में टिकाना ही शांति का पहला कदम है।
इस अनुभव से एक बात स्पष्ट होती है — भटक जाना और हमेशा के लिए हार जाना एक ही बात नहीं है।
✦ क्या करें
- • जो हो चुका है, उसे पहले स्वीकार कीजिए — विरोध से मन और थकता है।
- • आज एक छोटा-सा सही कर्म चुनिए, पूरा समाधान एक दिन में नहीं आता।
- • किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति से मन की बात कहिए।
- • दिन में कुछ क्षण शांत बैठकर श्वास पर ध्यान दीजिए।
✦ क्या न करें
- • स्वयं को दोष देकर मन को और कमज़ोर मत कीजिए।
- • क्रोध या भय में कोई बड़ा निर्णय अभी मत लीजिए।
- • दूसरों से अपनी परिस्थिति की तुलना मत कीजिए।
- • अकेलेपन में लंबे समय तक मत रहिए।
जिस दिन आप अपनी परिस्थिति को शांत मन से देख पाएँगे, उसी दिन से मार्ग स्वयं खुलने लगेगा। आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक सक्षम हैं।
इस अनुभव से एक बात सामने आती है
भटक जाना और हमेशा के लिए हार जाना एक ही बात नहीं है।
ऐसे ही कुछ और अनुभव
- “काम का इतना बोझ है कि दिमाग ऑफिस से घर आने के बाद भी बंद नहीं होता। बिस्तर पर लेटता हूँ तो अगले दिन के काम याद आने लगते हैं और नींद भी ठीक से नहीं आती। मैं इस लगातार तनाव को कैसे संभालूँ?”
- “पहले जिन छोटी-छोटी बातों पर मैं ध्यान भी नहीं देता था, अब वही बातें मुझे परेशान करने लगी हैं। छोटी बात होती है और पूरा दिन तनाव में निकल जाता है। क्या मैं जरूरत से ज्यादा सोचने लगा हूँ या मेरे ऊपर पहले से बहुत कुछ जमा हो चुका है?”
क्या यह परिस्थिति आपके जीवन से मिलती है?
यह जगह सलाह देने की नहीं, अपना अनुभव बाँटने की है।
अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा। पहली बात आपकी हो सकती है।
आपका नाम कहीं नहीं दिखेगा। हर अनुभव गुमनाम रहता है।
हर बात समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होती है।
