← पूजा और संस्कारचंद्र पूजा
चंद्रदेव से संबंधित · ग्रह शांति
अन्य नाम: सोमवार उपासना, चंद्र शांति
यह पूजा क्या है?
चंद्रदेव और शिव को समर्पित सोमवार की उपासना, जिसमें दूध से अभिषेक और श्वेत पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
चंद्र मन के कारक हैं। असंतुलित चंद्र से चिंता, अनिद्रा और भावनात्मक अस्थिरता होती है। यह पूजा मन को शीतल और स्थिर करने के लिए है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
मन शांत होता है; नींद सुधरती है; भावनात्मक संतुलन बनता है; माता के साथ संबंध और उनके स्वास्थ्य में शुभता की मान्यता।
कब की जाती है?
प्रत्येक सोमवार तथा पूर्णिमा, संध्या समय।
कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति। मानसिक तनाव से गुजर रहे लोगों के लिए विशेष।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
दूध ठंडा और शुद्ध हो। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना गया है।
कब नहीं करनी चाहिए?
अत्यधिक शीत-जनित रोग में जल-अर्घ्य के बदले केवल जप करें।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. संध्या स्नान कर श्वेत वस्त्र पहनें
- 2. शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें
- 3. श्वेत पुष्प, चावल और चंदन अर्पित करें
- 4. "ॐ सों सोमाय नमः" का 108 बार जप करें
- 5. चंद्रमा को जल और दूध मिलाकर अर्घ्य दें
- 6. चावल, दूध या श्वेत वस्त्र का दान करें
विस्तृत विधि
चंद्र उपासना का सार शीतलता है। परंपरा है कि अर्घ्य देते समय साधक चंद्रमा को देखते हुए गहरी साँस ले और अपने भीतर की उतावली को जल के साथ बहा देने का भाव रखे। जिनका मन अत्यंत अशांत रहता है, उन्हें सोलह सोमवार तक यह क्रम करने को कहा गया है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.दूध
- 2.जल
- 3.श्वेत पुष्प
- 4.चावल
- 5.चंदन
- 6.घी का दीपक
- 7.तांबे का लोटा
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
उत्तर भारत में सोलह सोमवार व्रत के रूप में; दक्षिण में प्रदोष उपासना से जुड़ा।
पारंपरिक महत्व
चंद्रमा को मन का प्रतीक कहा गया — जो मन को साध ले, वह परिस्थिति को साध लेता है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: शिव पुराण · ग्रह शांति परंपरा
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
शायद आप यह भी देखना चाहें

आपके अनुभव और प्रश्न
इस पूजा से जुड़ा अपना अनुभव या जिज्ञासा यहाँ साझा करें। नाम देना आवश्यक नहीं है।
अभी तक किसी ने कुछ नहीं कहा। पहली बात आपकी हो सकती है।