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दुर्गा सप्तशती पाठ

दुर्गा से संबंधित · नित्य पाठ

अन्य नाम: चंडी पाठ, सप्तशती पारायण

यह पूजा क्या है?

मार्कण्डेय पुराण अंतर्गत देवी महात्म्य के सात सौ श्लोकों का पाठ, जो पूर्ण या अध्याय-क्रम में किया जाता है।

किसकी पूजा है?

दुर्गा

इसे क्यों करते हैं?

दुर्गा शक्ति और रक्षा की अधिष्ठात्री हैं। यह पाठ भय को साहस में बदलने और अन्याय के सामने खड़े होने का बल देने के लिए किया जाता है।

इसे करने से क्या फल मिलता है?

भय और असुरक्षा में कमी; आत्मबल की वृद्धि; शत्रु और अन्याय से रक्षा की मान्यता; निर्णय में दृढ़ता।

कब की जाती है?

नवरात्रि में विशेष, किंतु किसी भी शुक्रवार या अष्टमी को भी किया जा सकता है।

कौन कर सकता है?

कोई भी व्यक्ति; स्त्रियों के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।

क्या कोई विशेष नियम हैं?

पाठ से पूर्व कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करने की परंपरा है। पाठ बीच में न छोड़ें।

कब नहीं करनी चाहिए?

अशौच काल में स्थगित करें।

कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम

  1. 1. स्नान कर लाल आसन पर बैठें
  2. 2. देवी के समक्ष घी का दीपक और धूप जलाएँ
  3. 3. लाल पुष्प, सिंदूर और नारियल अर्पित करें
  4. 4. कवच, अर्गला, कीलक के पश्चात सप्तशती का पाठ करें
  5. 5. अंत में देवी आरती करें
  6. 6. कन्या पूजन कर प्रसाद वितरण करें

विस्तृत विधि

सप्तशती का पूर्ण पाठ लंबा है, इसलिए परंपरा में इसे नवाह्न (नौ दिन) में विभाजित करने की विधि दी गई है — प्रथम दिन प्रथम अध्याय, फिर क्रमशः। जिनके पास समय कम हो वे केवल "या देवी सर्वभूतेषु" वाले तंत्रोक्त देवी सूक्त का पाठ कर सकते हैं। पाठ के समय स्वर दृढ़ रखें — शक्ति उपासना में दीन स्वर वर्जित माना गया है।

पूजा सामग्री — पूरी सूची

नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।

  • 1.दुर्गा सप्तशती पुस्तक
  • 2.लाल आसन
  • 3.सिंदूर
  • 4.लाल पुष्प
  • 5.नारियल
  • 6.घी का दीपक
  • 7.धूप

सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

कितने समय कीनवाह्न पाठ में प्रतिदिन 45 मिनट
घर या मंदिरघर या देवी मंदिर
पुरोहित आवश्यक?पूर्ण चंडी अनुष्ठान के लिए पुरोहित उपयुक्त

क्षेत्रीय अंतर

बंगाल में चंडी पाठ नवरात्रि का केंद्र है; उत्तर भारत में नवाह्न पारायण प्रचलित।

पारंपरिक महत्व

देवी महात्म्य वह ग्रंथ है जो सिखाता है कि शक्ति की उपासना भय से नहीं, स्वाभिमान से की जाती है।

परंपरा और संदर्भ

परंपरा: सनातन

क्षेत्र: भारत

संदर्भ: मार्कण्डेय पुराण — देवी महात्म्य

विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।

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