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शुक्र से संबंधित · ग्रह शांति
अन्य नाम: शुक्रवार पूजा, शुक्र ग्रह शांति
यह पूजा क्या है?
शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी को समर्पित शुक्रवार की पूजा, जिसमें श्वेत वस्त्र, चावल की खीर और सुगंध का प्रयोग होता है।
किसकी पूजा है?
इसे क्यों करते हैं?
शुक्र प्रेम, सौंदर्य, दांपत्य और सुख के कारक हैं। असंतुलित शुक्र से संबंधों में शुष्कता और असंतोष आता है। यह पूजा गृहस्थ जीवन में मधुरता लौटाने के लिए है।
इसे करने से क्या फल मिलता है?
दांपत्य संबंध में मधुरता; घर में सुख-सामग्री की वृद्धि की मान्यता; कला और रचनात्मकता में निखार; मन में संतोष।
कब की जाती है?
प्रत्येक शुक्रवार, प्रातः या संध्या।
कौन कर सकता है?
विवाहित दंपति तथा कोई भी साधक।
क्या कोई विशेष नियम हैं?
शुक्रवार को श्वेत वस्त्र, चावल, दही और सुगंध का दान श्रेष्ठ। इस दिन घर में कलह से पूर्ण संयम रखें।
कब नहीं करनी चाहिए?
कोई विशेष निषेध नहीं।
कैसे की जाती है? — संक्षिप्त क्रम
- 1. स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें
- 2. माता लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएँ
- 3. श्वेत पुष्प, चावल की खीर और इत्र अर्पित करें
- 4. "ॐ शुं शुक्राय नमः" का 108 बार जप करें
- 5. श्री सूक्त या लक्ष्मी स्तुति का पाठ करें
- 6. कन्या या सुहागिन स्त्री को श्वेत वस्तु दान करें
विस्तृत विधि
शुक्र की उपासना में सफाई और सुगंध का विशेष स्थान है। परंपरा कहती है कि जिस घर में शुक्रवार को स्वच्छता, सुगंध और मधुर वाणी हो, वहाँ लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। दंपति को इस दिन साथ बैठकर दीपक जलाने और एक-दूसरे के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा है।
पूजा सामग्री — पूरी सूची
नीचे दी गई सूची में सामान्य पूजन सामग्री और इस पूजा से जुड़ी विशेष सामग्री — दोनों सम्मिलित हैं। जो वस्तु उपलब्ध न हो, उसके स्थान पर जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर देना भी परंपरा में स्वीकार्य है।
- 1.श्वेत वस्त्र
- 2.चावल
- 3.दूध
- 4.शक्कर
- 5.श्वेत पुष्प
- 6.इत्र या चंदन
- 7.घी का दीपक
सामग्री क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
क्षेत्रीय अंतर
दक्षिण भारत में वरलक्ष्मी व्रत से जुड़ा; उत्तर भारत में संतोषी माता व्रत के रूप में भी प्रचलित।
पारंपरिक महत्व
शुक्र को दैत्यगुरु कहा गया — वे सिखाते हैं कि सुख भोग से नहीं, संतुलन से टिकता है।
परंपरा और संदर्भ
परंपरा: सनातन
क्षेत्र: भारत
संदर्भ: श्री सूक्त · ग्रह शांति परंपरा
विधि और सामग्री क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य पारंपरिक ढाँचा है, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
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आपके अनुभव और प्रश्न
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